Sunday, 3 July 2016

कोई तो लौटाए

कोई तो लौटाए





लौट आते वो पंछी

आम कि छावों

वही अपना गांव

बारिश सा बनी नदिया

उसमे लहराती इठलाती नईया

पुरानी यादें

तोतले यारों कि बातें

अपनों का साथ

दूर से आती बारात

तारों भरी रात

माँ का प्यार

फिर जोर से पड़ा हाथ

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