Wednesday, 15 June 2016

प्यार: जवाब या सवाल…


अच्छा हुआ जो कोई जवाब ना दिया
रुसवा जो हो मुहब्बत वो लम्हात ना दिया ।
कोई तो दाग लगता दमन में प्यार के
इस डर से उस सवाल से मुंह ही चुरा लिया ।
कोई तो हूक होगी मेरे हुक़ूक़ की
दिल की जुबाँ पे आपने मेरा नाम जो लिखा ।
रोया था मैँ भी साथ में तेरे बजूद के
आंसू की हर चुभन को हंसकर दबाया दिया ।
मन की हर इक दरार बुलाती है हर दफा
मजबूरियों के डर से जिसको छुपा लिया ।
तेरी वफ़ा पे हर जगह हमको यकीन है
बस तू कभी न सोचना हमने भुला दिया ।
देंगे तुम्हारा साथ तो हम हर जनम जनम
साथी हो तुम ख़ुदा ने ही हमको मिलाया था ।
कोई जवाब हो न हो लफ्ज़ो की छाव में
साँसो की लरज़ में दीदार-ए-यार हो गया ।
शिकवा करें तो क्यों महबूब से मेरे
रुसवाइयाँ कहाँ से हो जब प्यार हो गया ।
अच्छ हुआ जो कोई…