Wednesday, 15 June 2016

कुछ बात करें…

आओ कुछ बात करें
सुने सुनाएँ
अपने तुम्हारे दिलों की
चीखे चिल्लाएं
महसूस करें
साँसों की जुंबिश
हाथों की थिरकन
होठों की लरज़ और
माथे की शिकन
गएँ उन गीतों को जो
हमारे थे
कोसें उन लम्हों को जो
हमारे नहीं थे
आखिर सालों में मिले है हम
तो आओ कुछ बात करें ।

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